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लघु कथा दहेज़ की बलि वेदी पर बेटा

Posted On: 10 Apr, 2016 में

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लघु कथा संग्रह
कही…अनकही …..
लेखकीय ….
“कही.. अनकही” कहानी संग्रह में शामिल कहानियों,लघु कथाओं में पाठक जिन सुपात्रों- कुपात्रों से रूबरू होंगे उन्हें यदि अपनी पारखी नजरों से तलाशने की ईमानदार कोशिस करेंगे , तो मुझे विश्वास है उनके इर्द गिर्द वह जरूर मिलेंगे। मैं क्षमा प्रार्थी हूँ यदि किसी सुधि पाठक को किसी ‘कुपात्र‘ में अपनी छवि नजर आये । पाठक इसे एक संयोग मानें कि कोई ‘कुपात्र‘ किसी के व्यक्तित्व, कृतित्व से मिलता जुलता है मुकम्मल या आंशिक । राजीव कुमार ओझा
दहेज़ की बलि वेदी पर बेटा
सेठ करोड़ी मल के मेहमानखाने के खुशनुमा माहौल मे अकस्मात सेठ करोड़ी मल की चीख चिल्लाहट की वजह पहले तो वहां उपस्थित उनके खासुलखास मित्र तथा रिश्तेदार भी नहीं जान पाए कि अचानक सेठ जी हत्थे से उखड़ क्यों गए ? माजरा तब साफ हुआ जब उनके इकलौते पुत्र की शादी का प्रस्ताव लेकर आये पड़ोसी शहर के सेठ दीना नाथ से उन्होंने फटकार लगाता सबाल किया ‘‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुयी अपनी कुरूप बेटी का रिश्ता मेरे इकलौते बेटे से करने की सोंचने की?‘‘ मध्यस्थ सेठ रंगनाथ (जो सेठ करोड़ी मल के साले थे)ने शांतिदूत की भूमिका अदा करने में जिस तत्परता का प्रदर्शन किया वो काबिले रश्क थी। “जीजा दरवाजे आये मेहमान से ऐसे बात नहीं कीजिये ।आखिर दीना नाथ जी भी रसूख वाले हैं हैसियत में भी आपसे उन्नीस नहीं हैं ।“ साले साहब ने ‘ठण्ड रख ठण्ड’ का संकेत देते हुए अपने जीजा श्री के कान में न जाने कौन सा मन्त्र फूंका,कैसा ज्ञान दिया कि सेठ करोड़ी मल का चिल्लाना यूं थमा मानो वो हकीकतन नहीं सपने में चिल्लाए हों । वार्तालाप में अचानक उत्पन्न गतिरोध यूं समाप्त हुआ मानो सब कुछ सामान्य ही रहा हो ।सेठ दीना नाथ को साले साहब ने वार्ता आगे बढ़ाने को प्रोत्साहित किया तो वो बोले,‘‘ करोड़ी मल जी आप मेरी पूरी बात सुने बिना ही उखड़ गए। दरअसल सोनी मेरी इकलौती संतान है ,मेरी सारी संपत्ति की एकमात्र वारिस ।अब उसकी शादी की उम्र हो गयी ।आप तो जानते ही हैं अभागी के सर से माँ का साया उसके जन्मते ही उठ गया था । मैंने ही उसे माँ बन कर भी , बाप बनकर भी पाला पोसा है। पोलियो की वजह से वह चल फिर नहीं पाती थी, सो पढ़ लिख नहीं सकी ।रहा सबाल उसके कुरूप होने का तो क्या उसे कुँवारी ही छोड दूँ । आप न करेंगे तो कोई दूसरा दरवाजा देखूंगा । आखिर बाप हूँ उसका ।“
दीना नाथ की बात बीच में ही काट कर सेठ करोड़ी मल बोल उठे ‘‘गलती हमारी थी । मैं भावुक हो गया था ।आप दूसरा दरबाजा क्यों देखेंगे? आखिर मेरी भी तो कुछ सामाजिक जिम्मेवारी है ।किसी कन्या का विवाह उसके बिकलांग होने या कुरूप होने की वजह से ना हो ये मेरे जैसा सामाजिक व्यक्ति अपने जीते जी कैसे होने देगा ?आप तैयारी कीजिये मैं आपकी कन्या को बहु बना कर अपने घर लाने को अपना सौभाग्य समझूंगा।“
सारे लोग खा पी कर नींद के आगोश में थे। सेठ करोड़ी मल नर्म गुदगुदे बिस्तर पर स्वप्नलोक में विचर रहे थे ।सेठानी से गुफ्तगू कर रहे थे कि सेठ दीना नाथ से किये गए इस ‘सौदे’ से उनके आर्थिक साम्राज्य में कितने करोड़ कितने अरब का इजाफा होगा? अचानक रात के सन्नाटे को चीरती हुयी गोली की आबाज ने सन्नाटे को भंग किया। अफरा तफरी.. क्या हुआ क्या हुआ? का शोर उठा । दरअसल सेठ करोड़ी मल अपने जिस इकलौते पुत्र की शादी सेठ दीना नाथ की कुरूपा , अनपढ़ एवं लंगड़ी किन्तु सेठ दीना नाथ की अकूत दौलत की वारिस पुत्री से करने को तैयार थे उसने सेठ करोड़ी मल की लायसेंसी रिवाल्वर से अपने भेजे में लगातार दो गोलियां दाग कर अपनी इहलीला समाप्त कर ली थी । कौन कहता है कि दहेज़ की बलिबेदी पर सिर्फ लड़कियां ही चढ़ाई जाती हैं।

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