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गोएबल्स के नवयुगीन अवतार हैं मोदी :कांग्रेस मुक्त भारत का सच

Posted On 22 May, 2016 में

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2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी ने जोसेफ गोयेबल्स की निम्नांकित पंक्तियों – ”If you tell a lie big enough and keep repeating it , people will eventually come to believe it.atahe lie can be m aintained only for such time as the state can shield the people from the political,economic and or military consequencesof the lie .”-Joseph Goebbels पर अमल किया और एक सफ़ेद झूठ को लगातार दोहराते रहे। आजाद भारत के संसदीय इतिहास के 60 वर्ष कांग्रेस के रहे इस सफ़ेद झूठ को इतनी दमदारी से फेंटना शुरू किया की उसे अवाम ने सच मान लिया।प्रथम लोकसभा का गठन 4 अप्रैल 1952 में हुआ था। 2014 तक का हमारा संसदीय इतिहास 62 वर्षों का था। इस 62 वर्षों में गैर कांग्रेसी सरकारों का कार्यकाल जिसमे जनता पार्टी की सरकार ,वीपी सिंह सरकार (जिसमे भाजपा प्रत्यक्ष और अपरोक्ष रूप से शामिल थी )और अटल बिहारी सरकार का कार्य काल भी शामिल है।

संसदीय इतिहास के 60 वर्ष कांग्रेस के रहे मोदी के इस सफ़ेद झूठ को पेड़ मीडिया ने भी मुहरबन्द करने का काम किया। कमोवेश यही स्थिति 2014 के चुनाव अभियान में मोदी के तरकश से कांग्रेस पर चलाये गए भ्रष्टाचार ,मंहगाई ,काला धन ,आतंकवाद ,सीमा की सुरक्षा ,पकिस्तान और चीन के सन्दर्भ में सियासी तीरों का भी रहा। जिन्हें बाद में बेहयाई पूर्वक चुनावी जुमला कहा गया।भगवा पल्टन की सुविचारित कुटिल सियासी रणनीति का हिस्सा रहा है कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आक्रामक जुबानी जंग जारी रखना और भगवा पल्टन का भ्रष्टाचार उजागर होने पर चुप्पी साध लेना। मसलन राबर्ट बाड्रा को भूमि घोटाले (जिसमे भाजपा सरकार को न्यायालय में शर्मसार होना पड़ा क्योंकि राबर्ट बाड्रा के खिलाफ न्यायालय में वह कोई सबूत पेश नहीं कर पाई ) के सबाल पर कटघरे में खड़ा करने बाली भाजपा के चहेतों -चहेतियों को जिनमे गुजरात में मोदी की सियासी विरासत संभाल रही गुजरात की मुख्य मंत्री की सुपुत्री ,भाजपा सांसद हेमा मालिनी और कारपोरेट घरानों को मात दे रहे बाबा रामदेव को कौड़ियों के भाव करोड़ों की जमीन का तोहफा दिए जाने पर कटघरे में खड़ी मोदी सरकार और भगवा पल्टन ने चुप्पी ओढ़ ली। भ्रष्टाचार के मामले में बात कांग्रेसी चादर और भगवा चादर की कालिमा की है। चादर दोनों की दागदार है। यह बात दीगर है की भ्रष्टाचार के मामले में सियासी रणनीति में भगवा पल्टन ने कांग्रेस पर बढ़त ले रखी है।
गोएबल्स ज़िंदा होता तब अपने इस नवयुगीन अवतार नरेंद्र मोदी की पीठ उसे ठोकनी पड़ती। भगवा पल्टन गोएबल्स के नक़्शे कदम पर चलते हुए एक और सफ़ेद झूठ पर सच का मुलम्मा चढाने में जुटी है। उसके रणनीतिकार ऐसा सियासी वातावरण बनाने का प्रयास कर रहे हैं मानो पूरा देश भाजपा को स्वीकार करने और भगवा पल्टन की कांग्रेस मुक्त भारत की अवधारणा से सहमत हो। आंकड़ों पर गौर करें तब कांग्रेस मुक्त भारत की अवधारणा का सच सामने आएगा और भगवा पल्टन के रणनीतिकारों के अलोकतांत्रिक चरित्र और इस देश के ऐसे करोडो करोड़ मतदाताओं जिनकी पसंद कांग्रेस है ,जो कांग्रेस को वोट देते हैं को अपमानित करने की मानसिकता उजागर होगी।
सबसे पहले हमें भारतीय लोकतान्त्रिक व्यवस्था को समझना होगा। उस बिडंबना को समझना होगा जिसका परिणाम है की शुरुवाती कुछ चुनावों को छोड़ कर हमेशा से ही ऐसे दलों या बेमेल गठबंधनों का सत्ता पर कब्जा होता रहा है जिनके खिलाफ होता है जनादेश। लोकसभा और विधान सभा चुनावों के लिए भी जब तक 51 :49 प्रतिशत मतों की अनिवार्यता के संवैधानिक प्राविधान नहीं होंगे भारतीय लोकतंत्र इस बिडम्बना को झेलने को अभिशप्त रहेगा। आंकड़ों पर गौर करें तब भारतीय लोकतंत्र की बिडम्बना को समझा जा सकता है।
भगवा पल्टन की इस देश के मतदाताओं में स्वीकार्यता के दावों की हकीकत को समझने के लिए नजीर के तौर पर कुछ दिलचस्प आंकड़े। 1967 के लोक सभा चुनाव में 40. 8 प्रतिशत वोट हासिल कर सत्ता में आई कांग्रेस को 520 में 283 सीटें मिली थीं। 2014 के चुनाव में भगवा पल्टन की छवि बनाने ,कांग्रेस की छवि बिगाड़ने की सुपारी लिए मीडिया घरानों के अनैतिक कारनामों ,सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस सहित विभिन्न दलों में सेंधमारी ,बीते कल तक भाजपा के धूर विरोधियों से मौका परस्त गठबंधन के वावजूद भाजपा महज 31 प्रतिशत मतदाताओं का भरोसा जीत सकी थी। मोदी की कथित आंधी के वावजूद मीडिया के मिथ्या प्रचार के बीच चतुर्दिक हमले झेल रही कांग्रेस में लगभग 20 प्रतिशत वोटरों ने भरोसा जताया था. जो 2009 के आम चुनाव में भाजपा के 18. 5 प्रतिशत से ज्यादा था ।
पश्चिम बंगाल ,तमिलनाडु , असम ,केरल और पुडुचेरी विधान सभा चुनाव परिणाम के आंकड़े भी भाजपाई बड़बोलेपन और कांग्रेस मुक्त भारत के उसके अहंकारी दावों की पोल खोलते हैं। पश्चिम बंगाल में मोदी के जहर बुझे प्रचार को वोटरों ने ख़ारिज किया। 44 . 9 प्रतिशत वोटरों ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में भरोसा जताया और 294 सीटों में 211 सीट के साथ ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यहाँ भाजपा को मात्र 10 . 2 प्रतिशत वोट मिले जबकि कांग्रेस को 12. 3 प्रतिशत वोट मिले।2014 के आमचुनाव में भाजपा को यहाँ 17 प्रतिशत वोट मिले थे। यानि उसके जनाधार में 7 प्रतिशत की गिरावट है वहीँ कांग्रेस ने 2014 के 9 प्रतिशत के ट्रैक रिकार्ड को सुधारा ,उसे 12 . 3 प्रतिशत वोट मिले। तमिलनाडु में भी भाजपा को महज 2 . 8 प्रतिशत वोट मिले यहाँ उसकी बोहनी तक न हो सकी। यहाँ कांग्रेस ने 6 . 4 प्रतिशत वोट और 8 सीटें हासिल की हैं। केरल जिसे नरेंद्र मोदी ने सोमालिया कहा था वहां भी भाजपा को मात्र 10 . 5 प्रतिशत वोट मिले जबकि कांग्रेस को 23 .7 प्रतिशत वोट मिले।भाजपा का यहाँ खाता न खुला जबकि कांग्रेस को 22 सीटें मिलीं। असम के नतीजों को भी भगवा पल्टन ने कांग्रेस मुक्त भारत की ओर एक कदम और कहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तब असम के मतदाताओं में तुलनात्मक दृष्टि से कांग्रेस की स्वीकार्यता भाजपा से ज्यादा है। असम के 31 . 8 प्रतिशत वोटरों ने कांग्रेस में भरोसा जताया कॉंग्रेस को 5238655 मतदाताओं ने वोट दिए जबकि भाजपा का मत प्रतिशत 29 और उसे मिले मतों की संख्या 4992185 ही है और भाजपा विधायकों की संख्या मात्र 60 ही है जिसमे 40 कोंग्रेसी भाजपा के टिकट पर जीते हैं । पुडुचेरी में भी उसकी बोहनी तक न हो सकी।पांच राज्यों की 822 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा को महज 65 सीटों पर ही सफलता हासिल हो पाई।
कांग्रेस मुक्त भारत का अलोकतांत्रिक प्रलाप करने बाली भाजपा को असम में हासिल सफलता सांप्रदायिक ध्रुवीकरण ,असम के दलबदलू 9 कांग्रेसी विधायकों की वजह से मिली है। कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने बाली भगवा पल्टन को सत्ता के लिए दल बदलू कांग्रेसियों से गलबहियां करते देश ने लोक सभा चुनाव में भी देखा है।असम में 40 कोंग्रेसी भाजपा के टिकट पर जीते हैं 100 से अधिक कांग्रेसी बीजेपी के टिकट पर संसद में हैं । गोयेबल्स के नक़्शे कदम पर चलती भाजपा का कांग्रेस मुक्त भारत का मिथ्या प्रलाप प्रकारांतर से अलोकतांत्रिक भी है और कांग्रेस को मतदान करने बाले इस देश के करोड़ों नागरिकों का अपमान भी।

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajiv Kumar Ojha के द्वारा
June 5, 2016

आदरणीया शोभा जी ! नमस्ते ! आपका आभारी हूँ। आपकी शिकायत जायज है यह गलती अमूमन करता नहीं । आप रचनाधर्मी हैं आपसे उम्मीद करता हूँ की इस भूल को उदारता पूर्वक क्षमा कीजिये.. .भविष्य में ध्यान रखूँगा।

Rajiv Kumar Ojha के द्वारा
June 5, 2016

आदरणीया शोभा जी ! नमस्ते ! गोएबल्स के नवयुगीन अवतार हैं मोदी :कांग्रेस मुक्त भारत का सच पर आपकी प्रतिक्रिया अधूरी है सिर्फ श्री ओझा जी में आपका लेख बार-बार पढ़ा कुछ बातों में सहमत हूँ कहीं नहीं मेरी बेटी विदेश में रहती …इसके आगे के अंश आ नहीं पाए। कृपया पूरी प्रतिक्रिया दीजिये।


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