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Rajiv Kumar Ojha


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व्यंग्य बाबा दामदेव से ………

Posted On: 16 Apr, 2016  
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साठ साल में पहली बार …….

Posted On: 16 Apr, 2016  
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कब चेतेंगे हम ? हादसों के अतीत से कब लेंगे सबक ?

Posted On: 11 Apr, 2016  
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लघु कथा दहेज़ की बलि वेदी पर बेटा

Posted On: 10 Apr, 2016  
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जलेबी …..

Posted On: 9 Apr, 2016  
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पत्रकारिता का पतन काल …..

Posted On: 7 Apr, 2016  
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एक मर्द का कबूलनामा ….

Posted On: 6 Apr, 2016  
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प्रतिभा को कोसो मत: भारत माता की जय बोलो राजीव कुमार ओझा

Posted On: 4 Apr, 2016  
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झाड़ू के भी दिन फिरते हैं

Posted On: 2 Apr, 2016  
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संकट मे है बहादुरी .

Posted On: 2 Apr, 2016  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

हिन्दू धर्म के ठेकेदार भाई प्रकाश सिंह जी ! आपकी भाषा आपके संस्कार ,आपके व्यक्तित्व का आईना हैं। सच को स्वीकार करने के लिए मन मष्तिष्क पर हिन्दू -मुस्लिम की सतही सोंच सवार हो तब ऐसी ही प्रतिक्रिया सामने आती है। अब तक तो देश भक्ति की सनद बांटने वाले सिरफिरों को ही जानता था ,वन्धु श्रेष्ठ आपका आभार आपने एक नयी प्रजाति का परिचय प्राप्त करने का सुअवसर दिया जो हिन्दू होने की सनद बांटती है। फिलहाल मुझे आप जैसे महान विद्वान से किसी प्रमाण पत्र की जरुरत नहीं है। प्रभो आप तो त्रिकालदर्शी हो ,न होते तब कैसे जानते की मैं क्या था ,क्या हूँ ,क्या रहूंगा ? आपने अपने संस्कारों का परिचय दिया। आपको धन्यवाद।

के द्वारा: Rajiv Kumar Ojha Rajiv Kumar Ojha




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